Friday, 6 March 2015
Sunday, 1 March 2015
07-Ojasvi Peya
अच्युताय ओजस्वी पेय (Achyutaya Ojasvi Peya)
बल, बुद्धि एवं पाचन वर्धक
पाचनशक्तिवर्धक, कफ व पित्त शामक,स्मृतिवर्धक,कंठ एवं रक्तशुद्धिकर तथा हृदयरोग बहुमूत्रता में विशेष लाभदायक है ।
चाय-कॉफी के स्थान पर.....ओजस्वी चाय
जब भी चाय-कॉफी पीने की इच्छा हो तब उसके स्थान पर निम्नलिखित प्रयोग करके उसका सेवन करने से अत्यधिक लाभ होगा एवं सर्दी, जुकाम, खाँसी, श्वास, कफजनित बुखार, निमोनिया आदि रोग कभी नहीं होंगे।
बनपशा, छाया में सुखाये हुए तुलसी के पत्ते, दालचीनी, छोटी इलायची, सौंफ, ब्राह्मी के सूखे पत्ते, छिली हुई यष्ठिमधु – प्रत्येक वस्तु एक-एक तोला (लगभग 12-12 ग्राम)।
इन सबको अलग-अलग पीसकर मिश्रण बनाकर रखें। जब चाय पीने की इच्छा हो तब आधा तोला ( लगभग 6 ग्राम) चूर्ण को एक रतल (450 ग्राम) पानी में उबालें। आधा पानी शेष रहे तब छानकर उसमें दूध, मिश्री मिलाकर पियें। इससे मस्तिष्क में शक्ति, शरीर में स्फूर्ति और भूख बढ़ती है।
पाचनशक्ति व बुद्धि वर्धक, हृदय के लिए हितकारी
ओजस्वी चाय
14 बहूमूल्य औषधियों के संयोग से बनी यह ओजस्वी चाय क्षुधावर्धक, मेध्य व हृदय के लिए बलदायक है। यह मनोबल को बढ़ाती है। मस्तिष्क को तनावमुक्त करती है, जिससे नींद अच्छी आती है। यह यकृत के कार्य को सुधारकर रक्त की शुद्धि करती है।
इसमें निहित घटक द्रव्य व उनके लाभः
सोंठः कफनाशक, आमपाचक, जठराग्निवर्धक। ब्राह्मीः स्मृति, मेधाशक्ति व मनोबल वर्धक। अर्जुनः हृदयबल वर्धक, रक्त शुद्धिकर, अस्थि-पुष्टिकर। दालचीनीः जंतुनाशक, हृदय व यकृत उत्तेजक, ओजवर्धक। तेजपत्रः सुगंध व स्वाद दायक, दीपन, पाचक। शंखपुष्पीः मेध्य, तनावमुक्त करने वाली, निद्राजनक। काली मिर्चः जठराग्निवर्धक, कफघ्न, कृमिनाशक। रक्तचंदनः दाहशामक, नेत्रों के लिए हितकर। नागरमोथः दाहशामक, पित्तशामक, कृमिघ्न, पाचक। इलायचीः त्रिदोषशामक, मुखदुर्गधिहर, हृदय के लिए हितकर। कुलंजनः पाचक, कंठशुद्धिकर, बहूमूत्र में उपयुक्त। जायफलः स्वर व वर्ण सुधारनेवाला, रुचिकर, वृष्य। मुलैठी(यष्टिमधु)- कंठ शुद्धिकर, कफघ्न, स्वरसुधारक। सौंफः उत्तम पाचक, रुचिकर, नेत्रज्योतिवर्धक।
एक-आधा घंटा पहले अथवा रात को पानी में भिगोकर रखी हुई ओजस्वी चाय सुबह उबालें तो उसका और अधिक गुण आयेगा।
(यह ओजस्वी चाय सभी संत श्री आसारामजी आश्रमों व श्री योग वेदान्त समिति के सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध है।)
(1)Product Name :- Achyutaya Ojasvi Chay
(2)Quantity :- 200 g.
(3)Direction For Use :- Add 5 g. of powder in 150 ml. of water. Boil still it reduces to half . Then add equal quantity of milk & sugar as per requirement preferably.
(4)Benefits :- Daily use improve digestive power, memory, heart function, purifies blood, remove unwanted respiratory secretions, normalizes blood cholesterol & blood pressure.
By these action useful in poor apetite, constipation, lack of concentration, poor memory, excess sleep, headache, migraine, running nose, cough, bronchitis, asthma, heart diseases, blood impurities & related skin diseases etc.
(5) Main Ingredients :- Cinnamomum cassia(tejpatta), zingiber officinale(sunthi), convolvulus pluricaulis(shankhpushpi), Bacopa monieri(brahmi) etc.
Wednesday, 22 October 2014
06-ऐसी दिवाली मनाते हैं पूज्य बापूजी
~~~~~ ऐसी दिवाली मनाते हैं पूज्य बापूजी ~~~~~
पूज्य बापू जी दिवाली के दिनों में घूम-घूम कर जाते हैं उन आदिवासियों के पास, उन गरीब, बेसहारा, निराश्रितों के पास जिनके पास रहने को मकान नहीं, पहनने को वस्त्र नहीं, खाने को रोटी नहीं ! कैसे मना सकते हैं ऐसे लोग दिवाली? लेकिन पूज्य बापू द्वारा आयोजन होता है विशाल भंडारों का, जिसमें ऐसे सभी लोगों को इकट्ठा कर मिठाइयाँ, फल, वस्त्र, बर्तन, दक्षिणा, अन्न आदि का वितरण होता है।
पूज्य बापू जी दिवाली के दिनों में घूम-घूम कर जाते हैं उन आदिवासियों के पास, उन गरीब, बेसहारा, निराश्रितों के पास जिनके पास रहने को मकान नहीं, पहनने को वस्त्र नहीं, खाने को रोटी नहीं ! कैसे मना सकते हैं ऐसे लोग दिवाली? लेकिन पूज्य बापू द्वारा आयोजन होता है विशाल भंडारों का, जिसमें ऐसे सभी लोगों को इकट्ठा कर मिठाइयाँ, फल, वस्त्र, बर्तन, दक्षिणा, अन्न आदि का वितरण होता है।
Tuesday, 21 October 2014
05-Laxmi Sadhana
धनतेरस से आरंभ करें
सामग्रीः दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र, धूप अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र।
विधिः साधक अपने सामने गुरुदेव व लक्ष्मी जी के फोटो रखे तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र (रक्त कंद) बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रख दे। उस पर केसर से सतिया बना ले तथा कुमकुम से तिलक कर दे। बाद में स्फटिक की माला से मंत्र की 7 मालाएँ करे। तीन दिन तक ऐसा करना योग्य है। इतने से ही मंत्र-साधना सिद्ध हो जाती है। मंत्रजप पूरा होने के पश्चात् लाल वस्त्र में शंख को बाँधकर घर में रख दें। कहते हैं – जब तक वह शंख घर में रहेगा, तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी।
मंत्रः ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृह स्थिरो ह्रीं ॐ नमः।
04- धनतेरस सन्देश ( Dhanteras Sandesh)
~~~~ धनतेरस सन्देश ~~~~
धन्वंतरि महाराज खारे-खारे सागर में से औषधियों के द्वारा शारीरिक स्वास्थ्य-संपदा से समृद्ध हो सके, ऐसी स्मृति देता हुआ जो पर्व है, वही है धनतेरस। यह पर्व धन्वंतरि द्वारा प्रणीत आरोग्यता के सिद्धान्तों को अपने जीवन में अपना कर सदैव स्वस्थ और प्रसन्न रहने का संकेत देता है।
धनतेरस के दिन यमराज को दो दीपक दान करना चाहिये | तुलसी के आगे एक दीपक रखना चाहिये, दरिद्रता मिटाने के नेक काम आता है
Monday, 20 October 2014
03 - गौ-पूजन से सौभाग्यवृद्धि (Prosperity through worship of cows)
~~~~ गौ-पूजन से सौभाग्यवृद्धि ~~~~~
(गोपाष्टमी पर्व 31 अक्टूबर 2014 )
कार्तिक शुक्ल अष्टमी को ‘गोपाष्टमी’ कहते हैं । यह गौ-पूजन का विशेष पर्व हैं । इस दिन प्रातरूकाल गायों को स्नान कराके गंध-पुष्पादि से उनका पूजन किया जाता है । इस दिन गायों को गोग्रास देकर उनकी परिक्रमा करें और थोड़ी दूर तक उनके साथ जायें तो सब प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती है । सायंकाल जब गायें चरकर वापस आयें, उस समय भी उनका आतिथ्य, अभिवादन और पंचोपचार-पूजन करके उन्हें हरी घास, भोजन आदि खिलाएं और उनकी चरणरज ललाट पर लगायें । इससे सौभाग्य की वृद्धी होती है ।
- Rishi Prasad
Saturday, 18 October 2014
02-ख़ास सर्दियों के लिए बुद्धिशक्तिवर्धक प्रयोग
ख़ास सर्दियों के लिए बुद्धिशक्तिवर्धक प्रयोग
> मालकंगनी (ज्योतिष्मती) उत्तम मेधावर्धक हैं | १ से १० बूँद मालकंगनी तेल बतासे पर डालकर खायें | ऊपर से गाय का दूध पियें | ४० दिन तक यह प्रयोग करने से ग्रहण व स्मृति शक्ति में लक्षणीय वृद्धि होती है | इन दिनों में उष्ण, तीखे, खट्टे पदार्थों का सेवन न करें | दूध व घी का उपयोग विशेष रूप से करें |
> बादाम बौद्धिक, शारीरिक शक्ति व नेत्रज्योति वर्धक हैं | रात को ४ बादाम पानी में भिगो दें | सुबह छिलके उतार के जैसे हाथ से चंदन घिसते हैं, इस तरह घिस के दूध में मिलाकर सेवन करें | इस प्रकार से घिसा हुआ १ बादाम १० बादाम की शक्ति देता है | बालकों के लिए १ से २ बादाम पर्याप्त हैं |
प्रतिदिन मोरारजी देसाई गिनकर सात काजू खाते थे | इससे अधिक बादाम या काजू खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं | इससे गुर्दे (किडनी) और यकृत (लीवर) कमजोर हो जाते हैं | बिना भिगोये अथवा बिना छिलके उतारे बादाम खाने से पाचनतंत्र पर अधिक जोर पड़ता है |
> काले तिल मस्तिष्क व शारीरिक दुर्बलता को दूर करते हैं | १० ग्राम काले तिल सुबह खूब चबा-चबाकर खायें | ऊपर से ठंडा पानी पियें | बाद में २ – ३ घंटे तक कुछ न खायें | इससे शरीर को खूब पोषण मिलेगा | दाँत व केश भी मजबूत बनेगें | (पित्त प्रकृति के लोग यह प्रयोग न करें )
> ५० – ५० ग्राम गुड और अजवायन को अच्छी तरह कूटकर ६ – ६ ग्राम की गोलियाँ बना लें | प्रात: सायं एक-एक गोली पानी के साथ लें | एक सप्ताह में ही शरीर पर फैले हुए शीतपित्त के लाल चकत्ते दूर हो जाते हैं |
- Rishi Prasad
Thursday, 16 October 2014
01-Time to rejuvenate physical strength(बलप्रदायक प्रयोग )
~~~~~~~ बलप्रदायक प्रयोग ~~~~~
रात को ५० ग्राम देशी चने पानी में भिगो दें | सुबह उनमे हरा धनिया, पालक, गाजर, पत्तागोभी, मूली सब कच्चे ही काट के दाल दें | इसमें पिसी हुई काली मिर्च व सेंधा नमक मिलाकर नींबू निचोड़ दें | इस नाश्ते के रूप में खूब चबा-चबाकर खायें | दोपहर के भोजन के बाद पके हुए १ – २ केले खायें | यह प्रयोग पुरे शीतकाल में करने से शरीर पुष्ट, सुडौल व बलवान बनता है | रक्त की भी वृद्धि होती है |
एक चम्मच मक्खन, उतनी ही पिसी मिश्री व एक चुटकी पिसी हुई काली मिर्च को खूब मिलाकर चाट लें | ऊपर से कच्चे नारियल (अष्टमी को नारियल न खायें) के २ – ३ टुकड़े व थोड़ी –सी सौंफ खा लें | बाद में १ कप गर्म दूध पियें | इसे और पौष्टिक बनाने के लिए २ – ३ बादाम रात को पानी में भिगोकर सुबह चंदन की तरह घिस के मक्खन –मिश्री में मिलाकर लें |
- Rishi Prasad
रात को ५० ग्राम देशी चने पानी में भिगो दें | सुबह उनमे हरा धनिया, पालक, गाजर, पत्तागोभी, मूली सब कच्चे ही काट के दाल दें | इसमें पिसी हुई काली मिर्च व सेंधा नमक मिलाकर नींबू निचोड़ दें | इस नाश्ते के रूप में खूब चबा-चबाकर खायें | दोपहर के भोजन के बाद पके हुए १ – २ केले खायें | यह प्रयोग पुरे शीतकाल में करने से शरीर पुष्ट, सुडौल व बलवान बनता है | रक्त की भी वृद्धि होती है |
एक चम्मच मक्खन, उतनी ही पिसी मिश्री व एक चुटकी पिसी हुई काली मिर्च को खूब मिलाकर चाट लें | ऊपर से कच्चे नारियल (अष्टमी को नारियल न खायें) के २ – ३ टुकड़े व थोड़ी –सी सौंफ खा लें | बाद में १ कप गर्म दूध पियें | इसे और पौष्टिक बनाने के लिए २ – ३ बादाम रात को पानी में भिगोकर सुबह चंदन की तरह घिस के मक्खन –मिश्री में मिलाकर लें |
- Rishi Prasad
Tuesday, 14 October 2014
Kesharyukta Chyawanprash
~~~ अच्युताय च्यवनप्राश केशर(Achyutaya Kesharyukta Chyawanprash) ~~~~
सुवर्ण,चाँदी,लोह व् ताम्र सिद्ध जल में उबले हुए वीर्यवान
आँवलो में 56 बहुमूल्य जड़ी-बूटियों के साथ हिमालय से
लायी गयी दिव्यौषधि वज्रबला तथा चाँदी,लोह,बंग व
अभ्रक भष्म एवं शुद्ध केसर मिलाकर गाय के घी में आश्रम
के पवित्र वातावरण में वैदिक मन्त्रोच्चार के साथ इस रसायन
को बनाया गया है ।नैसर्गिक जीवन तत्वों व शक्तिशाली
खनिज द्रव्यों से भरपूर होने के कारण यह शरीर की समस्त
आवश्यकताओं की पूर्ति व कोशिकाओं का नवनिर्माण करता
है ।इस च्यवनप्राश का सेवन स्वस्थ या रुग्ण, युवक, वृद्ध,
दुर्बल, स्त्रीसंभोग से क्षीण, श्वास, राजयक्ष्मा,ह्रदयरोग से
पीड़ित सभी लोग सब ॠतुओं में कर सकते है ।
आश्रम के संतो व आयुर्वेदाचार्यो दवारा
परीक्षणों के बाद इस अद्वितीय व अमूल्य
च्यवनप्राश का निर्माण किया गया है ।
बुद्धि, तेज, वीर्य, उत्साह, प्रसन्नता को
बढाकर, नवचेतना प्रदान करता है ।
बुढ़ापा दूर होकर चिरयौवन,दीर्घायु की
प्राप्ति व रोगों से सुरक्षा होती है ।
यह ह्रदय,यकृत, व फेफडों को
बल प्रदान कर शरीर को हष्ट-पुष्ट
व शक्तिशाली बनाता है ।
(1)Product Name :- Achyutaya Kesharyukta Chyawanprash
(2)Quantity :- 1000 gm. / 500 gm.
(3)Direction For Use :- 1 to 2 t.s.f. once or twice a day on empty stomach ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals) OR as directed by physician.
(4)Benefits :- By virtue of keshar & powerful bhasma specially useful for persons with heavy mental work, weakness, anaemia, spermatorrhoea, night fall, sexual dysfunction etc.
By using this divine rasayan Old Chyawan Rushi regained youth.
It improves & maintains youth, memory, grasping power, skin glow, physical strength.
Useful in chronic deabilitating diseases, T.B., chronic respiratory tract disorders, malnourished & thin built individuals.
Useful in male & female infertility. The best health booster for daily use in all age group.
(5) Main Ingredients :- Saffron(keshar), Emblica officinalis(amla), Boerhaavia Diffusa(punarnava) and more than 56 divine medicine from himalaya.
सुवर्ण,चाँदी,लोह व् ताम्र सिद्ध जल में उबले हुए वीर्यवान
आँवलो में 56 बहुमूल्य जड़ी-बूटियों के साथ हिमालय से
लायी गयी दिव्यौषधि वज्रबला तथा चाँदी,लोह,बंग व
अभ्रक भष्म एवं शुद्ध केसर मिलाकर गाय के घी में आश्रम
के पवित्र वातावरण में वैदिक मन्त्रोच्चार के साथ इस रसायन
को बनाया गया है ।नैसर्गिक जीवन तत्वों व शक्तिशाली
खनिज द्रव्यों से भरपूर होने के कारण यह शरीर की समस्त
आवश्यकताओं की पूर्ति व कोशिकाओं का नवनिर्माण करता
है ।इस च्यवनप्राश का सेवन स्वस्थ या रुग्ण, युवक, वृद्ध,
दुर्बल, स्त्रीसंभोग से क्षीण, श्वास, राजयक्ष्मा,ह्रदयरोग से
पीड़ित सभी लोग सब ॠतुओं में कर सकते है ।
आश्रम के संतो व आयुर्वेदाचार्यो दवारा
परीक्षणों के बाद इस अद्वितीय व अमूल्य
च्यवनप्राश का निर्माण किया गया है ।
बुद्धि, तेज, वीर्य, उत्साह, प्रसन्नता को
बढाकर, नवचेतना प्रदान करता है ।
बुढ़ापा दूर होकर चिरयौवन,दीर्घायु की
प्राप्ति व रोगों से सुरक्षा होती है ।
यह ह्रदय,यकृत, व फेफडों को
बल प्रदान कर शरीर को हष्ट-पुष्ट
व शक्तिशाली बनाता है ।
(1)Product Name :- Achyutaya Kesharyukta Chyawanprash
(2)Quantity :- 1000 gm. / 500 gm.
(3)Direction For Use :- 1 to 2 t.s.f. once or twice a day on empty stomach ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals) OR as directed by physician.
(4)Benefits :- By virtue of keshar & powerful bhasma specially useful for persons with heavy mental work, weakness, anaemia, spermatorrhoea, night fall, sexual dysfunction etc.
By using this divine rasayan Old Chyawan Rushi regained youth.
It improves & maintains youth, memory, grasping power, skin glow, physical strength.
Useful in chronic deabilitating diseases, T.B., chronic respiratory tract disorders, malnourished & thin built individuals.
Useful in male & female infertility. The best health booster for daily use in all age group.
(5) Main Ingredients :- Saffron(keshar), Emblica officinalis(amla), Boerhaavia Diffusa(punarnava) and more than 56 divine medicine from himalaya.
Monday, 13 October 2014
Trifla Churna
~~~~~~ अच्युताय त्रिफला चूर्ण(Achyutaya Trifla Churna) ~~~~~~~
लाभ : आँखों की सुजन, लालिमा,दृष्टीमांद्द,कब्ज,पांडूरोग, डायबिटीज,मूत्ररोग,त्वचा-विकार, जीर्णज्वर एवं पीलिया में लाभप्रद
मात्रा :
कब्ज के लिए रात को सोते समय 2 से 6 ग्राम
की मात्रा में गुनगुने या सादे पानी से ले
नेत्ररोग : आँखों की सुजन, लालिमा, व दृष्टीमांद्द,
में 50 मी.ली. पानी में 2 ग्राम चूर्ण दो घंटे
भिगोकर रखे बाद में छानकर उस पानी में
2-3 मिनिट तक आँखों की पलकें झपकायें
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