Tuesday, 18 August 2015

21-Mint (कुदरत का करिश्मा पुदीना)

>>>कुदरत का करिश्मा पुदीना<<<

<> पुदीने की चटनी व शरबत के सेवन से गैस समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
<> पुदीने में मौजूद फाइबर कोलैस्ट्राल कम करने में मदद करता है।
<> पुदीना का रस किसी घाव पर लगाने से जख्म जल्दी भर जाते हैं।
<> उल्टी होने पर आधा कप पुदीना का रस हर दो घंटे पर रोगी को पिलाइए, इससे उल्टी आना बंद हो जाएगा।
<>  पेटदर्द होने पर पुदीने को जीरा, हींग, काली मिर्च में नमक मिलाकर पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है।
<> ताजा-हरा पुदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगा लें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इससे त्वचा की गर्मी समाप्त होती है।

Sunday, 16 August 2015

20- Lemon (छोटे नींबू के लाभ बड़े)

>>>> छोटे नींबू के लाभ बड़े <<<<

<> किसी कारण से प्यास लगती हो, तो नींबू चूसने या शिकंजी पीने से तुरंत प्यास बंद हो जाती है।
<> ताजे नींबू का रस निकालकर नाक में पिचकारी देने से नाक से खून गिरता हो, तो बंद हो जाएगा।
<> चुटकी भर हींग को नींबू में मिलाकर चूसने से मिर्गी रोग में लाभ होगा।
<> नींबू का रस व शहद मिलाकर मसूड़ों पर मलते रहने से रक्त व पीप आना बंद हो जाएगा।
<> एक चम्मच नींबू का रस व शहद मिलाकर पीने से हिचकी बंद हो जाएगी।
<> नींबू में फिटकरी का चूर्ण भरकर खुजली वाले स्थान पर रगड़ने से खुजली समाप्त हो जाएगी।

Saturday, 15 August 2015

19-Ashwagandha(गुणों की खान हैं अश्वगंधा)

>>>> गुणों की खान हैं अश्वगंधा <<<<<

<> आधा चम्मच अश्वगंधा सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध के साथ लें, इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। शरीर में कम्पन हो तो ठीक होगा।

<> वजन कम होने से परेशान हैं तो एक गिलास दूध में 1 से 3 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को मिला कर इसका सेवन करें।

<> अश्वगंधा के चूर्ण की एक−एक ग्राम मात्रा दिन में तीन बार लेने पर शरीर में हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणों की संख्या तथा बालों का काला पन बढ़ता है।

<> यदि अश्वगंधा, मुलहठी और आंवला तीनों को समान मात्रा लेकर चूर्ण बनाकर एक चम्मच नियमित रूप से सेवन किया जाये तो आंखों की रोशनी बढ़ती है।

Friday, 14 August 2015

18-Honey(शहद की बेहतरीन खूबियाँ और प्रयोग)


>>>>  शहद की बेहतरीन खूबियाँ और प्रयोग <<<<

<> अदरक का रस और शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी-जुकाम में बहुत आराम मिलता है.
<> मुहांसों पर रात में सोते समय दालचीनी चूर्ण और शहद मिलाकर लगायें और सुबह धो लें, मुहांसे ठीक होंगे और दाग भी नहीं रहेंगे.
<> हलके गुनगुने पानी में शहद और नीम्बू का रस मिलाकर सुबह पीने से वजन कम होता है,कब्ज दूर होता है, साथ ही शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते है.
<> होठों पर शहद लगाने से होंठ नर्म,मुलायम होते हैं.
<> एक चम्मच लहसुन का रस और शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह शाम पीने से ब्लड प्रेशर काबू में रहता है .

Thursday, 13 August 2015

17-punarnava(पुनर्नवा के लाभ)




 >>>> शरीर को पुनः नया बना देता है  पुनर्नवा<<<<

<> पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी,किडनी फेल्युअर, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है

<> प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि होने पर पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण का सेवन करें

<> संधिवात में पुनर्नवा के पत्तों की भाजी सोंठ डालकर खायें।

<> पैर की एड़ी में वेदना होती हो तो पुनर्नवा में सिद्ध किया हुआ तेल पैर की एड़ी पर लगाए एवं सेंक करें।

<> मोटापा दूर करने के लिए पुनर्नवा के 5 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। पुनर्नवा की सब्जी बना कर खायें।

<> पेट के रोगः गोमूत्र एवं पुनर्नवा का रस समान मात्रा में मिलाकर पियें।

Wednesday, 12 August 2015

16-Brahmi (ब्राह्मी के लाभ)

>>>>>> दिमाग की शक्‍ति बढाए ब्राह्मी <<<<<<<
जिन बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं या उनमें एकाग्रता की समस्या है तो उन्हें 200 मिली गर्म दूध में 1 चम्मच ब्राह्मी का चूर्ण हर रोज खाने के लिए दें।
लगातार मानसिक कार्य करने से थकान हो जाने पर जब व्यक्ति की कार्यक्षमता घट जाती है तो ब्राह्मी के उपयोग से आश्चर्यजनक लाभ होता है।
ब्राह्मी की ताजी पत्तियों का स्वरस 2.5 मिलीग्राम मात्रा में शहद लेकर सेवन करें, इससे भी रक्तचाप नियंत्रित रहेगा।
यदि पेशाब में तकलीफ हो या पेशाब रूक रहा हो तो बस ब्राह्मी के दो चम्मच स्वरस में मिश्री मिलाकर दें। इससे पेशाब खुल कर आएगा।

जिन व्यक्तियों को अनिंद्रा से सम्बन्धित शिकायत रहती है, उन्हे यह प्रयोग करना चाहिए। सोने से 1 घन्टा पूर्व 250 मिली0 गर्म दूध में 1 चम्मच ब्रहमी का चूर्ण मिलाकर नित्य सेवन करने से रात्रि में नींद अच्छी आती है

Tuesday, 11 August 2015

14-Musli (मूसली के लाभ)




>>>> बिजली जैसी ताकत प्रदान करने वाली...मूसली <<<<
<> यह  उत्तम बलप्रद, पौष्टिक, रसायन, कांति-वर्धक एवं उत्कृष्ट वीर्यवर्धक है ।
<> नियमित सेवन से शरीर की सभी धातुओं का पोषण होकर शरीर सुदृढ़ बनता है ।
<> यह मांस-पेशी, अस्थियाँ एवं स्नायुओं की दुर्बलता दूर करके उनका बल बढाता है ।
<>  दुर्बल रोगियों का वजन एवं बल बढाकर शरीर को मजबूत बनाता है ।
<> यह बुद्धिशक्ति एवं स्मृतिशक्ति बढाकर मानसिक क्षमता को बढाता है ।
<> शारीरिक-मानसिक दुर्बलता, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना, वीर्य का पतलापन,शीघ्रपतन, शुक्राणु की कमी,में भी लाभदायी है ।  

Monday, 10 August 2015

13- Amrita




>>>अमृत तुल्य गुणों की खान अमृता(गिलोय)<<<
 
*इसके स्वरस में मधु मिलाकर सेवन से बल बढता है।

*सौठ चूर्ण के साथ लेने पर मंदाग्नि दूर होती है।


*इसके चूर्ण लेने से मूत्रा दाह दूर होकर मूत्रा सापफ आता है।

*इसकी जड का क्वाथ पिलाने से बारी से आने वाला ज्वर मिटता है।

* घृत के साथ सेवन करने से वात रोग मिटता है।

* गुड के साथ सेवन करने से कब्ज मिटती है।

* गिलोय, हरड, नागर मोथा चूर्ण को मधु के साथ सेवन करने से मेदो रोग(मोटापा चर्बी) मिटता है।

Sunday, 9 August 2015

12- Amla



आंवले के औषधीय गुण देखकर आप दंग रह जायेगे

आंवले के अन्दर विटामिन `सी´ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसके विटामिन गर्म करने और सुखाने से भी खत्म नहीं होते।

आंवला युवको को जवान बनाए रखता है और बूढ़ों को युवाशक्ति प्रदान करता है।

आंवला हमारे दांतों और मसूढ़ों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है एवं तन-मन को फुर्तीला बनाता है।

नर्वस सिस्टम (स्नायु रोग), हृदय की बेचैनी, धड़कन, मोटापा, जिगर,ब्लडप्रेशर, दाद, प्रदर, गर्भाशय दुर्बलता, नपुसंकता, चर्म रोग, मूत्ररोग एवं हडिड्यों आदि के रोगों में आंवला बहुत उपयोगी होता है।

Saturday, 8 August 2015

11- AloeVera




एलोवेरा
एलोवेरा से बेहतर कुछ नहीं

* एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज़, गर्भाशय के रोग तथा पेट के विकारों को दूर करता है।
* गुलाब जल में एलोवेरा का रस मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा में नमी बरकरार रहती है और खोई नमी लौटती है।
* कहीं भी जलने या चोट लगने पर एलोवेरा का रस लगाने से बहुत आराम मिलता और वो तेज़ी से भी ठीक होती है।
* घृतकुमारी अल्पमात्र में दीपन, पाचन, कटुपौष्टिक, यकृत उत्तेजक तथा बड़ी मात्रा में विरेचन, कृमिघ्न, रक्तशोधक, आर्त्तजनन, गुण वाली होती है। वर्तमान समय में एलोजेल का सौन्दर्य प्रसाधन में अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है, विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक उत्पाद सभी संत श्री आशारामजी आश्रम व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं।