Thursday, 13 August 2015

17-punarnava(पुनर्नवा के लाभ)




 >>>> शरीर को पुनः नया बना देता है  पुनर्नवा<<<<

<> पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी,किडनी फेल्युअर, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है

<> प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि होने पर पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण का सेवन करें

<> संधिवात में पुनर्नवा के पत्तों की भाजी सोंठ डालकर खायें।

<> पैर की एड़ी में वेदना होती हो तो पुनर्नवा में सिद्ध किया हुआ तेल पैर की एड़ी पर लगाए एवं सेंक करें।

<> मोटापा दूर करने के लिए पुनर्नवा के 5 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। पुनर्नवा की सब्जी बना कर खायें।

<> पेट के रोगः गोमूत्र एवं पुनर्नवा का रस समान मात्रा में मिलाकर पियें।

Wednesday, 12 August 2015

16-Brahmi (ब्राह्मी के लाभ)

>>>>>> दिमाग की शक्‍ति बढाए ब्राह्मी <<<<<<<
जिन बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं या उनमें एकाग्रता की समस्या है तो उन्हें 200 मिली गर्म दूध में 1 चम्मच ब्राह्मी का चूर्ण हर रोज खाने के लिए दें।
लगातार मानसिक कार्य करने से थकान हो जाने पर जब व्यक्ति की कार्यक्षमता घट जाती है तो ब्राह्मी के उपयोग से आश्चर्यजनक लाभ होता है।
ब्राह्मी की ताजी पत्तियों का स्वरस 2.5 मिलीग्राम मात्रा में शहद लेकर सेवन करें, इससे भी रक्तचाप नियंत्रित रहेगा।
यदि पेशाब में तकलीफ हो या पेशाब रूक रहा हो तो बस ब्राह्मी के दो चम्मच स्वरस में मिश्री मिलाकर दें। इससे पेशाब खुल कर आएगा।

जिन व्यक्तियों को अनिंद्रा से सम्बन्धित शिकायत रहती है, उन्हे यह प्रयोग करना चाहिए। सोने से 1 घन्टा पूर्व 250 मिली0 गर्म दूध में 1 चम्मच ब्रहमी का चूर्ण मिलाकर नित्य सेवन करने से रात्रि में नींद अच्छी आती है

Tuesday, 11 August 2015

14-Musli (मूसली के लाभ)




>>>> बिजली जैसी ताकत प्रदान करने वाली...मूसली <<<<
<> यह  उत्तम बलप्रद, पौष्टिक, रसायन, कांति-वर्धक एवं उत्कृष्ट वीर्यवर्धक है ।
<> नियमित सेवन से शरीर की सभी धातुओं का पोषण होकर शरीर सुदृढ़ बनता है ।
<> यह मांस-पेशी, अस्थियाँ एवं स्नायुओं की दुर्बलता दूर करके उनका बल बढाता है ।
<>  दुर्बल रोगियों का वजन एवं बल बढाकर शरीर को मजबूत बनाता है ।
<> यह बुद्धिशक्ति एवं स्मृतिशक्ति बढाकर मानसिक क्षमता को बढाता है ।
<> शारीरिक-मानसिक दुर्बलता, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना, वीर्य का पतलापन,शीघ्रपतन, शुक्राणु की कमी,में भी लाभदायी है ।  

Monday, 10 August 2015

13- Amrita




>>>अमृत तुल्य गुणों की खान अमृता(गिलोय)<<<
 
*इसके स्वरस में मधु मिलाकर सेवन से बल बढता है।

*सौठ चूर्ण के साथ लेने पर मंदाग्नि दूर होती है।


*इसके चूर्ण लेने से मूत्रा दाह दूर होकर मूत्रा सापफ आता है।

*इसकी जड का क्वाथ पिलाने से बारी से आने वाला ज्वर मिटता है।

* घृत के साथ सेवन करने से वात रोग मिटता है।

* गुड के साथ सेवन करने से कब्ज मिटती है।

* गिलोय, हरड, नागर मोथा चूर्ण को मधु के साथ सेवन करने से मेदो रोग(मोटापा चर्बी) मिटता है।

Sunday, 9 August 2015

12- Amla



आंवले के औषधीय गुण देखकर आप दंग रह जायेगे

आंवले के अन्दर विटामिन `सी´ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसके विटामिन गर्म करने और सुखाने से भी खत्म नहीं होते।

आंवला युवको को जवान बनाए रखता है और बूढ़ों को युवाशक्ति प्रदान करता है।

आंवला हमारे दांतों और मसूढ़ों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है एवं तन-मन को फुर्तीला बनाता है।

नर्वस सिस्टम (स्नायु रोग), हृदय की बेचैनी, धड़कन, मोटापा, जिगर,ब्लडप्रेशर, दाद, प्रदर, गर्भाशय दुर्बलता, नपुसंकता, चर्म रोग, मूत्ररोग एवं हडिड्यों आदि के रोगों में आंवला बहुत उपयोगी होता है।

Saturday, 8 August 2015

11- AloeVera




एलोवेरा
एलोवेरा से बेहतर कुछ नहीं

* एलोवेरा का जूस बवासीर, डायबिटीज़, गर्भाशय के रोग तथा पेट के विकारों को दूर करता है।
* गुलाब जल में एलोवेरा का रस मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा में नमी बरकरार रहती है और खोई नमी लौटती है।
* कहीं भी जलने या चोट लगने पर एलोवेरा का रस लगाने से बहुत आराम मिलता और वो तेज़ी से भी ठीक होती है।
* घृतकुमारी अल्पमात्र में दीपन, पाचन, कटुपौष्टिक, यकृत उत्तेजक तथा बड़ी मात्रा में विरेचन, कृमिघ्न, रक्तशोधक, आर्त्तजनन, गुण वाली होती है। वर्तमान समय में एलोजेल का सौन्दर्य प्रसाधन में अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है, विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक उत्पाद सभी संत श्री आशारामजी आश्रम व समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं।

Friday, 6 March 2015

08 - Ojasvi Peya


अच्युताय ओजस्वी पेय (Achyutaya Ojasvi Peya)

बल, बुद्धि एवं पाचन वर्धक

पाचनशक्तिवर्धक, कफ व पित्त शामक,स्मृतिवर्धक,कंठ एवं रक्तशुद्धिकर तथा हृदयरोग बहुमूत्रता में विशेष लाभदायक है ।

चाय-कॉफी के स्थान पर.....ओजस्वी चाय

Sunday, 1 March 2015

07-Ojasvi Peya


अच्युताय ओजस्वी पेय (Achyutaya Ojasvi Peya)

बल, बुद्धि एवं पाचन वर्धक

पाचनशक्तिवर्धक, कफ व पित्त शामक,स्मृतिवर्धक,कंठ एवं रक्तशुद्धिकर तथा हृदयरोग बहुमूत्रता में विशेष लाभदायक है ।

चाय-कॉफी के स्थान पर.....ओजस्वी चाय

जब भी चाय-कॉफी पीने की इच्छा हो तब उसके स्थान पर निम्नलिखित प्रयोग करके उसका सेवन करने से अत्यधिक लाभ होगा एवं सर्दी, जुकाम, खाँसी, श्वास, कफजनित बुखार, निमोनिया आदि रोग कभी नहीं होंगे।

बनपशा, छाया में सुखाये हुए तुलसी के पत्ते, दालचीनी, छोटी इलायची, सौंफ, ब्राह्मी के सूखे पत्ते, छिली हुई यष्ठिमधु – प्रत्येक वस्तु एक-एक तोला (लगभग 12-12 ग्राम)।


इन सबको अलग-अलग पीसकर मिश्रण बनाकर रखें। जब चाय पीने की इच्छा हो तब आधा तोला ( लगभग 6 ग्राम) चूर्ण को एक रतल (450 ग्राम) पानी में उबालें। आधा पानी शेष रहे तब छानकर उसमें दूध, मिश्री मिलाकर पियें। इससे मस्तिष्क में शक्ति, शरीर में स्फूर्ति और भूख बढ़ती है।


पाचनशक्ति व बुद्धि वर्धक, हृदय के लिए हितकारी

ओजस्वी चाय


14 बहूमूल्य औषधियों के संयोग से बनी यह ओजस्वी चाय क्षुधावर्धक, मेध्य व हृदय के लिए बलदायक है। यह मनोबल को बढ़ाती है। मस्तिष्क को तनावमुक्त करती है, जिससे नींद अच्छी आती है। यह यकृत के कार्य को सुधारकर रक्त की शुद्धि करती है।


इसमें निहित घटक द्रव्य व उनके लाभः


सोंठः कफनाशक, आमपाचक, जठराग्निवर्धक। ब्राह्मीः स्मृति, मेधाशक्ति व मनोबल वर्धक। अर्जुनः हृदयबल वर्धक, रक्त शुद्धिकर, अस्थि-पुष्टिकर। दालचीनीः जंतुनाशक, हृदय व यकृत उत्तेजक, ओजवर्धक। तेजपत्रः सुगंध व स्वाद दायक, दीपन, पाचक। शंखपुष्पीः मेध्य, तनावमुक्त करने वाली, निद्राजनक। काली मिर्चः जठराग्निवर्धक, कफघ्न, कृमिनाशक। रक्तचंदनः दाहशामक, नेत्रों के लिए हितकर। नागरमोथः दाहशामक, पित्तशामक, कृमिघ्न, पाचक। इलायचीः त्रिदोषशामक, मुखदुर्गधिहर, हृदय के लिए हितकर। कुलंजनः पाचक, कंठशुद्धिकर, बहूमूत्र में उपयुक्त। जायफलः स्वर व वर्ण सुधारनेवाला, रुचिकर, वृष्य। मुलैठी(यष्टिमधु)- कंठ शुद्धिकर, कफघ्न, स्वरसुधारक। सौंफः उत्तम पाचक, रुचिकर, नेत्रज्योतिवर्धक।

एक-आधा घंटा पहले अथवा रात को पानी में भिगोकर रखी हुई ओजस्वी चाय सुबह उबालें तो उसका और अधिक गुण आयेगा।

(यह ओजस्वी चाय सभी संत श्री आसारामजी आश्रमों व श्री योग वेदान्त समिति के सेवा केन्द्रों पर उपलब्ध है।)


(1)Product Name :- Achyutaya  Ojasvi Chay
(2)Quantity :- 200 g.
 (3)Direction For Use :- Add 5 g. of powder in 150 ml. of water. Boil still it reduces to half . Then add equal quantity of milk & sugar as per requirement preferably.
(4)Benefits :- Daily use improve digestive power, memory, heart function, purifies blood, remove unwanted respiratory secretions, normalizes blood cholesterol & blood pressure.
               By these action useful in poor apetite, constipation, lack of concentration, poor memory, excess sleep, headache, migraine, running nose, cough, bronchitis, asthma, heart diseases, blood impurities & related skin diseases etc.


(5) Main Ingredients :-  Cinnamomum cassia(tejpatta), zingiber officinale(sunthi), convolvulus pluricaulis(shankhpushpi),  Bacopa monieri(brahmi) etc.